टाटा संस एजीएम: टाटा समूह में साइरस मिस्त्री जैसे विवाद की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लिया गया यह बड़ा फैसला, विस्तार से पढ़ें | TATA Sons AGM: टाटा ग्रुप में साइरस मिस्त्री जैसे चिरायु की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लिया गया यह बड़ा फैसला, पढ़ें विस्तार से

साइरस मिस्त्री को 2012 में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था लेकिन 2016 में चार साल बाद अचानक उन्हें बाहर कर दिया गया था।

भारतीय कॉरपोरेट जगत में सबसे चर्चित विवादों में से एक है टाटा संस(टाटा संस) टाटा समूह(टाटा समूह)ने साइरस मिस्त्री ((साइरस मिस्त्री) भविष्य में इस तरह के किसी भी झगड़े को रोकने के लिए नियुक्ति नियमों में एक बड़ा बदलाव किया गया है। टाटा संस ने 30 अगस्त को कंपनी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के दौरान शेयरधारकों से भी मंजूरी मांगी थी। बैठक में कंपनी ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन समेत कई नियमों में बदलाव किया है। अब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के पदों को अलग कर दिया गया है। नए नियम के तहत इन पदों पर किसी एक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की जा सकती है। टाटा संस 103 अरब डॉलर के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है जिसमें टाटा के दोनों ट्रस्टों की करीब 52 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एक है सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और दूसरा है सर रतन टाटा ट्रस्ट। दोनों ट्रस्टों का नेतृत्व वर्तमान में रतन टाटा कर रहे हैं(रतन टाटा) कर रहा है।

क्या था बड़ा बदलाव?

टाटा समूह की एजीएम ने एसोसिएशन के लेखों में बदलाव को मंजूरी दी, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टाटा संस के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सभी निदेशकों की मंजूरी। इसके साथ ही अध्यक्ष और निदेशक के पदों पर नियुक्ति की सिफारिश करने के लिए एक समिति भी बनाई गई है।

ऐसे काम करेगा नया नियम

नियुक्ति की सिफारिश करने वाली समिति के अध्यक्ष का चयन दोनों न्यासों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। अब दोनों ट्रस्टों के अध्यक्ष के पद पर या ट्रस्ट और टाटा संस के अध्यक्ष के पद पर किसी एक व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जा सकता है। समिति में दोनों ट्रस्टों के तीन-तीन सदस्यों को नियुक्त किया जा सकता है। एक सदस्य को टाटा संस का बोर्ड भी नामित करेगा।

एजीएम में शेयरधारकों ने तीसरी बार टाटा संस के बोर्ड में एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में पिरामल इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अजय पीरामल की नियुक्ति को मंजूरी दी। टाटा ट्रस्ट के दोनों नामित वेणु श्रीनिवासन भी उसी पद के लिए फिर से चुने गए। टाटा संस में शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की 18.4% हिस्सेदारी है। आपको बता दें कि साइरस मिस्त्री की नियुक्ति के बाद दोनों उद्योग समूहों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।

टाटा-मिस्त्री विवाद क्या था?

टाटा संस में शापूरजी पल्लोनजी समूह की 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पलोनजी मिस्त्री के बेटे साइरस मिस्त्री ने 2012 में रतन टाटा की जगह टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला, लेकिन चार साल बाद 2016 में अचानक उन्हें बाहर कर दिया गया। तब से उनका टाटा समूह के साथ टकराव चल रहा है। टाटा समूह ने ही टाटा संस में एसपी समूह की हिस्सेदारी खरीदने की पेशकश की, जिसके लिए मिस्त्री परिवार तैयार नहीं था। मामला कोर्ट में भी पहुंचा जिसने टाटा के पक्ष में फैसला सुनाया।

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